लखनऊ यूनिवर्सिटी (Lucknow University) ने अपने सभी सहयुक्त महाविद्यालयों को एक जरूरी और अर्जेंट लेटर भेजा है, जिसमें साफ कहा गया है कि वर्ष 2026-27 में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण महाभियान (Tree Plantation Campaign) चलाया जाना है। यह पत्र रजिस्ट्रार डॉ. भावना मिश्रा की ओर से जारी किया गया है और इसे “टॉप प्रायोरिटी, आज ही” कैटेगरी में भेजा गया है, यानी इसमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं है।

लेटर में बताया गया है कि यूपी गवर्नमेंट (UP Government) की तरफ से 11 जून 2026 को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, लखनऊ को निर्देश जारी किए गए थे, जिसके क्रम में लखनऊ यूनिवर्सिटी ने 17 जून 2026 को एक पत्र (संख्या: जी.ओ.-11362) जारी करते हुए सभी कॉलेजों से नोडल अधिकारी (Nodal Officer) नामित करने को कहा था। लेकिन अब तक कई कॉलेजों से इसका रिस्पॉन्स नहीं मिला है, जिसके चलते यूनिवर्सिटी को दोबारा रिमाइंडर भेजना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 3 मई 2026 को हुई एक समीक्षा बैठक में पूरे प्रदेश में 35 करोड़ वृक्षारोपण (35 Crore Tree Plantation) का बड़ा टारगेट तय किया गया था। इस मेगा प्लान में हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट (Higher Education Department) को भी शामिल किया गया है, जिसे 20 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है।
इस टारगेट को पूरा करने के लिए हर जिले, हर यूनिवर्सिटी और हर कॉलेज को अपने-अपने स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य है, ताकि पूरा कैंपेन ऑर्गनाइज्ड तरीके से चल सके।
कॉलेजों को दिए गए सख्त निर्देश
रजिस्ट्रार ने अपने लेटर में सभी प्रिंसिपल्स और मैनेजर्स को साफ शब्दों में कहा है कि वे तुरंत अपने-अपने कॉलेज से एक नोडल अधिकारी नामित करें और इसकी जानकारी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी (Regional Higher Education Officer) के साथ-साथ यूनिवर्सिटी को भी ईमेल आईडी “registrar@lkouniv.ac.in” पर भेजें। यह जानकारी “तत्काल/आज ही” उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इससे पहले क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. अश्विनी कुमार मिश्र ने भी 12 जून 2026 को एक पत्र जारी कर 19 जून तक डेडलाइन दी थी, लेकिन कई कॉलेज इसमें पीछे रह गए।
सोशल मीडिया कैंपेन और जन-भागीदारी पर जोर
शासनादेश में यह भी कहा गया है कि इस अभियान को “एक पेड़ माँ के नाम” थीम के तहत चलाया जाए और इसमें जन-प्रतिनिधियों, स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स, NGO, सिविल सोसाइटी और आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही सोशल मीडिया, वॉल राइटिंग और कम्युनिटी रेडियो के जरिए भी इस कैंपेन को प्रमोट करने की बात कही गई है।
फिलहाल सभी कॉलेजों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे बिना देरी किए नोडल अधिकारी की नियुक्ति करें, वरना आगे यूनिवर्सिटी की तरफ से कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।
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